Top 5 Lessons From Ramayana in Hindi

Top 5 Lessons From Ramayana in Hindi || रामायण से पांच सीख

Top 5 Lessons From Ramayana in Hindi (रामायण से सीख): जैसा की आप सब जानते है रामायण एक प्राचीन महाकाव्य है, जिसे वाल्मीकि जी ने संस्कृत भाषा में लिखा है | रामायण में रघुवंश के राजा श्री राम चन्द्र जी की गाथा है, जो की त्रेतायुग की है | रामायण में मर्यादा पुरषोत्तम श्री राम जी के मानव जीवन का वर्णन है | रामायण में दशरथ पुत्र राम के भगवान श्री राम बनने की कथा है |

रामायण में 7 अध्याय है जो 7 कांडों के नाम से जाने जाते  है |

वाल्मीकि के बाद तुलसीदास जी ने अवधि भाषा में रामचरित्र मानस लिखा | इसी तरह वाल्मीकि द्वारा लिखित वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास कृत तुसली रामायण के नाम से जानी जाती है |

रामायण इंसान को बताती है कि मानव को किस तरह का जीवन जीना चाहिए | किस तरह परिवार और समाज में तालमेल रखा जाए, एक उत्तम पुरुष को किस तरह जीना चाहिए, सब कुछ रामायण में निहित है |

रामायण से यदि कुछ बाते भी सीखी जाए, तो मानव जीवन सफल माना जा सकता है | Top 5 Lessons From Ramayana in Hindi इस पोस्ट में बताने जा रहे है |

आप चाहे जिस भी धर्म से हो, आपको अपने जीवन में एक बार रामायण पढनी चाहिए क्योकि इसमें मानव जीवन में आने वाले दुखो से कैसे निपटा जाये वह सब कुछ बताया गया है |

आइये जानते है Top 5 Lessons From Ramayana in Hindi:

  • हर परिस्तिथि समान भाव रखना: रामायण से जो सबसे बेहतर सीख मिल सकती है, वो यही है कि हम जीवन में विपत्ति आने पर ना अवसाद से घिर जाये और ना सफलता पाने पर ख़ुशी से पागल हो जाए | जीवन में कुछ भी Permanent नहीं है |

जब राम को पिता दशरथ अयोध्या का राजा बनाने की घोषणा करते है, तब राम बहुत ज्यादा हर्षित नहीं हुए और जब पिता ने 14 वर्ष का वनवास दिया तो चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी | उन्होंने सब कुछ विधाता की मर्जी मान कर सहर्ष स्वीकार किया |

जिस माता कैकई ने उन्हें वनवास दिया, उनके प्रति राम का प्रेम कम नही हुआ | उन्होंने बिना देर किया राजसी वस्त्र बदल कर सन्यासी का वेश धारण कर लिया |

आज के दौर में हम देखते है कि थोड़ी भी परेशानी आने पर लोग खुदखुशी जैसे गलत कदम उठा लेते है |  बच्चे एग्जाम में फ़ैल हो जाए, किसी को व्यापार मे घाटा हो जाए, किसी को अपने किसी प्रिय जन की बात बुरी लग  जाए तो सीधा म्रत्यु को लगे लगा लेते है |

  • भविष्य के प्रति निराशावादी ना हो : हर कोई बेहतर जीवन जीने की कामना करता है, लेकिन हमेशा चिंता में घिरे रहकर आप आने वाला कल बेहतर नहीं बना सकते|

इसका बड़ा सीधा सा उदाहरण रामायण में है , जब राम वन को जाते है साथ में लक्षमण और सीता भी है, तो ये जंगल के भयानक द्रश्यो को याद करके चिंतित नहीं होते बल्कि ये सोच कर खुश होते है की वन में उन्हें कई महान संतो से मिलने का अवसर मिलेगा| प्रकृति के साथ उनका सम्बन्ध और प्रगाढ़ होगा |

हमेशा जीवन में भविष्य की कामना Positive सोच के साथ करनी चाहिए | Future में क्या बेहतर से बेहतर हो सकता है उन सभी पहलुओ को याद करके अपने मन को मजबूत करना चाहिए |

Best FIVE Lessons From Ramayana in Hindi

  • अहंकार त्याग कर ज्ञानी जनों का आदर करना चाहिए : आज के दौर में थोडा भी पैसा आने पर इंसान निचे देखना ही छोड़ देता है, अहंकार से भर जाता है | हर इंसान जिसके पास उनसे कम पैसा है उसे हीन नजर से देखने लगते है | उन्हें रामायण से सीखना चाहिए कि प्रथ्वी के राजा राम सभी गुरुजन और ज्ञानी संत का इतना आदर करते है कि अपने राज सिंघासन से उतर कर प्रणाम करके उनकी सेवा करते है |

राजा दशरथ, जिनके पूर्वज महान थे उनका ज्ञानी लोगो के प्रति आदर अकथनीय था |

जब मैं ज्ञानी संत कह रहा हूँ इसका मतलब किसी धर्म विशेष से नहीं है बल्कि हर उस इंसान से है जो ज्ञान में आपसे बेहतर है , फिर चाहे वो किसी भी धर्म, जाती और संप्रदाय का हो |

  • अधिकार के बजाय त्याग से अपनों को जीते : बड़ी असंभव सी बात आपको जान पड़ेगी, लेकिन किसी भी व्यक्ति, वस्तु या स्थान पर अधिकार करके आप सिर्फ दुश्मन पैदा करते है | अधिकार में अहंकार जुड़ा है, जो दुसरो को तुच्छ बनाकर खुद को श्रेष्ठ मानता है |

रामायण त्याग से भरी पढ़ी है जैसे की राम का राज त्याग, भरत का राम जी के लिए राज त्याग, लक्ष्मण का भाई राम के लिए त्याग, सीता का त्याग, कौसल्या का त्याग और भी कई |

हम अपनों को ज्यादा देकर यदि प्रेम बढ़ा सकते है तो बढ़ाना चाहिए क्योकि आपमें त्याग की भावना सामने वाले में आपके लिए त्याग की भावना को बढ़ा देती है |

आप मेरी बात को इस तरह समझे कि कभी भी दुसरे का अधिकार उनसे न छीने, बल्कि उन्हें उनका अधिकार दिलाने में उनकी मदद करे |

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  • हर समय ईश्वर का धन्यवाद करे : आप चाहे किसी भी धर्म से जुड़े हो आपको अपने ईश्वर का हर समय शुक्रिया करते रहना चाहिए  | हर सुबह आँखे खुलते ही सबसे पहले उस परमात्मा को स्मरण करके उन्हें अपने जीवन के लिए धन्यवाद देना चाहिए |

राम जी हर सुबह अपने इष्ट देव  की पूजा करते, माता कौसल्या भगवान विष्णु की आराधना करती, और तो और रावण भी ब्रम्हा और शंकर जी की पूजा आराधना करते थे |

आपके पास आज जो भी है उसके लिए अभी से ही ईश्वर का धन्यवाद दीजिये |

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